आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संकेत है “पल्स प्रेशर”, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, पल्स प्रेशर शरीर की हृदय संबंधी स्थिति को समझने में अहम भूमिका निभाता है। यदि इसे समय रहते पहचान लिया जाए, तो गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है।
पल्स प्रेशर का मतलब सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर के बीच का अंतर होता है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg है, तो उसका पल्स प्रेशर 40 माना जाएगा। सामान्यतः 40 के आसपास का पल्स प्रेशर सही माना जाता है, लेकिन यदि यह लगातार 60 या उससे अधिक हो जाए, तो यह हृदय रोगों का शुरुआती संकेत हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाई पल्स प्रेशर धमनियों के सख्त होने, हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ने और ब्लड सर्कुलेशन में गड़बड़ी का संकेत देता है। बढ़ती उम्र, धूम्रपान, मोटापा, तनाव, डायबिटीज और खराब खानपान इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। कई बार मरीज को कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते, इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, कम नमक का सेवन, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। यदि आपका पल्स प्रेशर लगातार बढ़ा हुआ रहता है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। छोटी सी लापरवाही भविष्य में हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।


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