मथुरा: टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी (टीकेए) आज दुनिया भर में सबसे अधिक किए जाने वाले ऑर्थोपेडिक ऑपरेशनों में से एक है, जो गंभीर नी आर्थराइटिस से पीड़ित मरीजों को बेहतर चलने-फिरने की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता प्रदान करता है। पिछले दो दशकों में रोबोटिक-असिस्टेड टीकेए (आरए-टीकेए) एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति के रूप में उभरा है, जो सर्जरी में अधिक सटीकता, रियल-टाइम फीडबैक और मरीज की जरूरत के अनुसार प्लानिंग की सुविधा देता है। इसके बावजूद, कई मिथकों और गलतफहमियों के कारण अभी भी कुछ जगहों पर इसका उपयोग सीमित है।
रोबोटिक-असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट में एडवांस इमेजिंग, कंप्यूटर आधारित प्लानिंग और रोबोटिक आर्म सिस्टम का उपयोग किया जाता है, जो सर्जन की मदद करता है। यह समझना जरूरी है कि रोबोट खुद सर्जरी नहीं करता, बल्कि सर्जन के नियंत्रण में एक सटीक टूल की तरह काम करता है। इस प्रक्रिया में ऑपरेशन से पहले सीटी स्कैन के आधार पर मरीज की हड्डियों की संरचना के अनुसार योजना बनाई जाती है और सर्जरी के दौरान रियल-टाइम मैपिंग के जरिए रोबोटिक सिस्टम एक “सेफ ज़ोन” तय करता है, जिससे हड्डियों की कटाई सटीक तरीके से हो और आसपास के टिश्यू को कम से कम नुकसान पहुंचे।
मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के ऑर्थोपेडिक्स, जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के चेयरमैन एवं रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के चीफ डॉ. रमणीक महाजन ने बताया “पारंपरिक सर्जरी की तुलना में रोबोटिक तकनीक कई मायनों में बेहतर साबित हो रही है। यह इम्प्लांट की पोजिशनिंग को अधिक सटीक बनाती है, जो सर्जरी की लंबी अवधि की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सही एलाइनमेंट से इम्प्लांट जल्दी खराब होने, अस्थिरता और दोबारा सर्जरी की जरूरत को कम किया जा सकता है। साथ ही, हर मरीज के शरीर के अनुसार सर्जरी की प्लानिंग की जा सकती है, जिससे इम्प्लांट के साइज और फिटिंग में बेहतर सामंजस्य बनता है और दर्द या मूवमेंट की समस्या कम होती है। घुटने के आसपास के लिगामेंट और सॉफ्ट टिश्यू का संतुलन बनाना इस सर्जरी का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा होता है, जिसमें रोबोटिक सिस्टम सर्जन को रियल-टाइम डेटा प्रदान करता है। इससे जॉइंट की स्थिरता बेहतर होती है और मरीज को प्राकृतिक मूवमेंट का अनुभव मिलता है। इसके अलावा, सटीक तकनीक के कारण अनावश्यक टिश्यू डैमेज और ब्लड लॉस भी कम होता है, जिससे दर्द कम होता है, रिकवरी तेजी से होती है और जटिलताओं की संभावना घटती है।“
इस तकनीक को लेकर कई तरह की गलतफहमियां भी प्रचलित हैं। सबसे आम मिथक यह है कि रोबोट खुद सर्जरी करता है, जबकि वास्तविकता यह है कि पूरी सर्जरी सर्जन ही करते हैं और रोबोट केवल उनकी सटीकता बढ़ाने में मदद करता है। कुछ लोग मानते हैं कि रोबोटिक सर्जरी में ज्यादा समय लगता है, लेकिन अनुभव के साथ सर्जरी का समय पारंपरिक सर्जरी के बराबर हो जाता है। यह भी धारणा है कि यह तकनीक केवल युवा मरीजों के लिए है, जबकि बुजुर्ग और अधिक वजन वाले मरीज भी इससे अधिक लाभ उठा सकते हैं। इम्प्लांट के प्रयोगात्मक होने की बात भी गलत है, क्योंकि इसमें वही प्रमाणित इम्प्लांट इस्तेमाल होते हैं जो पारंपरिक सर्जरी में उपयोग किए जाते हैं।
डॉ. रमणीक ने आगे बताया “कई लोग यह भी सोचते हैं कि इसके दीर्घकालिक परिणाम साबित नहीं हैं, जबकि वर्तमान शोध बेहतर एलाइनमेंट, बेहतर फंक्शन और सकारात्मक परिणामों की पुष्टि करते हैं। लागत को लेकर भी भ्रम है, लेकिन कम जटिलताओं, जल्दी रिकवरी और दोबारा सर्जरी की कम जरूरत के कारण यह लंबे समय में किफायती साबित हो सकती है। साथ ही, यह धारणा भी गलत है कि रोबोटिक सर्जरी में सर्जन की भूमिका कम हो जाती है, क्योंकि सफल परिणाम के लिए सर्जन का अनुभव, सही मरीज का चयन और उचित योजना आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। मरीजों के लिए यह जानना जरूरी है कि रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट एक स्थापित और सुरक्षित प्रक्रिया है, जिसे अनुभवी सर्जन द्वारा किया जाता है। इसमें रोबोट एक सटीक टूल के रूप में काम करता है, जिससे इम्प्लांट की सही पोजिशनिंग सुनिश्चित होती है। इसके परिणामस्वरूप दर्द में कमी, तेजी से रिकवरी और लंबे समय तक बेहतर कार्यक्षमता हासिल की जा सकती है।“
रोबोटिक-असिस्टेड टोटल नी आर्थ्रोप्लास्टी ऑर्थोपेडिक सर्जरी में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है, जो सटीकता, व्यक्तिगत उपचार और बेहतर परिणामों को संभव बनाता है। इससे जुड़ी कई गलतफहमियां पुराने विचारों पर आधारित हैं, जबकि वैज्ञानिक प्रमाण इसके लाभों को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, इसका उद्देश्य अधिक से अधिक मरीजों तक इसके फायदे पहुंचाना होना चाहिए, ताकि उन्हें अधिक प्राकृतिक और लंबे समय तक टिकाऊ नी रिप्लेसमेंट का लाभ मिल सके।
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